Nirjala Ekadashi Vrat Katha | Pandava Ekadashi Katha

Nirjala Ekadashi Vrat Katha, Pandava Ekadashi Katha, Pandava Nirjala Ekadashi: हरे कृष्णा दोस्तों निर्जला एकादशी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाए. निर्जला पांडवा एकादशी 11 जून 2022 को है इस एकादशी को पांडवा एकादशी या निर्जला एकादशी कहते है क्यूंकि इस एकादशी का व्रत निर्जला रखा जाता है जो कोई भी इस एकादशी का व्रत निर्जला रखता है उसे सभी एकादशी का फल मिलता है, और जो कोई इस व्रत को निर्जला नहीं रख सकता है तो सरजल या फलाहार भी रख सकते है.

जो कोई भी भक्ति में प्रगति करना चाहता है तो उसे भक्ति के अनुकूल हो उसे अपनाना और जो प्रतिकूल हो उसे त्यागना होता है जब ही कोई व्यक्ति भक्ति में उन्नति कर सकते है, और भक्ति में अनुकूल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सादन है एकादशी व्रत का पालन करना इसलिए आपको एकादशी का व्रत करना चाहिए. एकादशी का व्रत सभी व्रतों से बड़ा है और इस व्रत को करके आप भगवान् को खुश कर सकते है.

ऐसे में अगर आप इस पांडवा एकादशी या निर्जला एकादशी का व्रत कर रहे है तो इस व्रत की कथा जरूर पढ़े जिससे आपको इस व्रत का पूरा लाभ मिले. तो चलिए शुरू करते है और जानते है निर्जला एकादशी व्रत कथा.

Nirjala Ekadashi Vrat Katha – Pandava Ekadashi Katha

पौराणिक कथा के अनुसार सभी पांडव निर्जला एकादशी व्रत का पालन करते थे लकिन भीम एकादशी का पालन नहीं कर पाते थे क्यूंकि उनसे भूख बर्दाश्त नहीं होती थी तब एक बार भीम ने व्यास जी से कहा की में दान कर सकता हु, जप कर सकता हु, भगवत कथा कर सकता हु, श्रवण कर सकता हु लकिन एक पल ही बिना भोजन नहीं रह सकता इसलिए में सभी एकादशी का व्रत नहीं रख सकता तब व्यासदेव जी ने कहा महीने में 2 एकादशी आती है और हर व्यक्ति को इन एकादशी का पालन करना चाहिए.

तब भीमसेन बोले में तो सिर्फ एक दिन ही व्रत कर सकता हु तो आप कृपा करके ऐसे व्रत के बारे में बताये जो में एक दिन करके मेरा जीवन मंगलमय बन जाए तब व्यास जी ने कहा की ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की तिथि को निर्जला एकादशी आती है इसके पालन से सभी एकादशी के पालन का फल मिलता है लकिन इस एकादशी में जल भी नहीं पीना है यह सुन कर भीमसेन बहुत प्रसन्न हुए और पूरी विधि विधान से इस निर्जला एकादशी व्रत का पालन करते है इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव निर्जला एकादशी भी कहते है.

इस निर्जला एकादशी के पूरे दिन जल नहीं पीना है और कुछ खाना भी नहीं है और पूरे दिन भगवान श्री कृष्ण के अधिक से अधिक नाम का जाप करे जो है (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे) इस मंत्र का कम से कम 25 माला का जाप करे, भगवत गीता का पाठ करे, कीर्तन करे और भगवान् से जुड़े सभी काम करे.

एकादशी की रात को जागरण भी करे अगर आप जागरण नहीं कर सकते है तो अगले दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान् श्री कृष्ण की पूजा करे और मंगला आरती करे, और जिन्होंने निर्जला एकादशी का पालन किया वो ब्राह्मणो को जल दान दे और उनसे आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करे.

इस व्रत के दौरान नींद, झूठ, छल आदि से बचे और पूरे दिन भगवान् श्री कृष्ण के महिमा का गान करे जिससे इस पांडव निर्जला एकादशी का पूरा लाभ प्राप्त हो. जो व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत रखता है उसका व्रत अगले दिन पारण करने के समय में पानी पी कर खोला जाता है और जो व्यक्ति सफला व्रत रखते है उनका व्रत अगले दिन पारण करने के समय में अन्न खा कर खोला जाता है.

निर्जला एकादशी व्रत पारण करने का समय

निर्जला एकादशी व्रत पारण करने का समय लोकेशन के हिसाब से अलग अलग होता है, व्रत पारण करने का सही समय जानने के लिए आप अपने नजदीकी ISKCON Temple जा कर समय पूछ सकते है और अगर आपके पास कोई ISKCON Temple नहीं है तो आप यहाँ क्लिक करके Vaishnava Calendar App Download करके अपने लोकेशन का व्रत पारण करने का समय जान सकते है.

धन्यवाद!

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Team: HindiGrab.in

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