Vijaya Ekadashi Vrat Katha 2022 | विजया एकादशी व्रत कथा

Vijaya Ekadashi Vrat Katha 2022, विजया एकादशी व्रत कथा: अगर आप विजया एकादशी व्रत करना चाहते है तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद है क्यूंकि आज हम इस आर्टिकल में Vijaya Ekadashi Vrat Katha, विजया एकादशी शुभ मुहूर्त, और विजया एकादशी कब है. के बारे में जानेंगे.

यह तो आपको पता ही है की एक साल में 24 एकादशी आती है और इनमे से हर महीने में 2 एकादशी आती है. एक एकादशी शुक्लपक्ष में आती है और दूसरी एकादशी कृष्णपक्ष में आती है.
हिन्दू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व होता है क्यूंकि एकादशी का दिन भगवान् कृष्ण को अत्यंत प्रिय होता है और अगर इस दिन कोई व्रत रखता है तो वह व्यक्ति जन्म जन्मान्तर के पापो से मुक्त हो जाता है, वह भक्ति के मार्ग में आगे बढता है, और उसके पास कभी भी धन की कमी नही होती है.

फरवरी महीने की दूसरी एकादशी आने वाली है इस दिन आप व्रत जरुर रखे. यह एकादशी फाल्गुन महीने की पहली एकादशी है और इसका नाम विजया एकादशी है. तो चलिए शुरू करते है और जानते है विजया एकादशी व्रत कथा (Vijaya Ekadashi Vrat Katha).

Vijaya Ekadashi Vrat Katha – विजया एकादशी व्रत कथा

महाराज युधिष्टर ने भगवान् श्री कृष्ण जी से पूछा, हे वासुदेव फाल्गुन मास में कृष्णपक्ष में कौनसी एकादशी आती है और इस एकादशी की कथा क्या है तब भगवान् श्री कृष्ण जी बोले एक समय की बात है नारद ने ब्रह्मा जी से पूछा की फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष एकादशी का विधान कहिए तब ब्रह्मा जी कहने लगे की, हे नारद फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष एकादशी को विजया एकादशी कहते है और विजया एकादशी के व्रत का पालन करने वाले व्यक्ति को पुराने और नए सभी पापो से मुक्ति मिलती है.

त्रेतायुग में श्री राम चन्द्र जी को जब 14 वर्षो का वनवास हो गया था तब वे लक्ष्मण जी और सीता माँ के सहित पंचवटी में निवास करने लगे और वहापर जब दुष्ट रावन ने सीता माँ का हरण किया था तब इस समाचार से श्री रामचन्द्र जी और लक्षमण जी अत्यंत व्याकुल हुए और वे सीता माँ की खोज करने चल दिए और वहा घूमते घूमते जब वे जटायु के पास पहुचे और जटायु वहा घायल थे तो जटायु ने उन्हें सीता माँ का वृतांत सुना कर स्वर्ग लोक को चले गये.

श्री रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी कुछ और आगे चले तब उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई और प्रभु श्री राम जी ने बाली का वध किया और साथ साथ हनुमान जी ने लंका में जाकर सीता माँ का पता लगाया और फिर वहा से हनुमान जी लौटकर भगवान् श्री राम जी के पास आकर उनसे सभी समाचार कह सुनाये. श्री राम जी और लक्ष्मण जी वहा से लौटकर लंका का दहन के बाद सुग्रीव के साथ निर्णय लेकर भगवान् श्री राम लंका जाना सुनिस्तित किया.

सागर तीर आने पर श्री राम जी ने लक्ष्मण जी से कहा है सुमित्रानंदन इस सागर में अनेक भयानक जिव जन्तु है इसे कैसे पास करे तब लक्ष्मण जी बोले हे प्रभु आप ही आदिदेव और पुराण और पुरुष पुरुषोतम है आपसे कुछ भी छुपाना असंभव है इस द्वीप में प्राचीन काल से मुनि रहते है यहाँ एक उनका आश्रम है उन्हें इस समस्या का समाधान पूछना चाहिए.

श्री राम जी और लक्ष्मण जी मुनि के पास उनसे मिलने गये और उन्हें सादर प्रणाम किया मुनिवर ने उन्हें देखते ही पहचान लिया की यही परम पुरुषोतम श्री राम है अत्यंत आनंद पूर्वक उन्होंने पूछा की प्रभु किस कारन आपका यहा आने हुआ है तब श्री रामचन्द्र जी ने कहा हे मुनिवर रावन संहार करने में यहा आया हु कृपया आप इस सागर को पार करने का उपाय बताये.

तब ऋषि बोले हे राम फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी का व्रत करने से निश्चय ही आपकी विजय होगी साथ ही साथ आप इस समुन्द्र को भी आसानी से पार कर लेंगे. इस व्रत की विधि यह है की दशमी के दिन स्वर्ण, चांदी, तम्बा, या मिट्टी का एक गडा बनाये और उस गड़े को जल से भर कर पांच पलवरक् वेदिका पर स्थापित करे और उस गड़े के नीचे सत्नाज और उपर जौ रखे उसपर भगवान् श्री नारायण की स्वर्ण की मूर्ति स्थापित करे.

एकादशी के दिन स्नान आदि से निवरत हो कर धुप द्वीप नारियल आदि से भगवान् की पूजा करे और गड़े के सामने बैठ कर भगवान् के पवित्र नामो का जप करते हुए दिन व्यतीत करे और रात्री को भी इसी प्रकार कीर्तन करते हुए जागरण रखे उसके बाद द्वादशी के दिन नदी या तालाब के किनारे उस कलश की विधिवत पूजा करके वो कलश किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए हे राम यदि तुम इस व्रत को सेनापतियो के सहित करोगे तो तुम्हारी विजय अवस्य होगी.

फिर भगवान् श्री राम जी ने इस व्रत का पालन किया और इसके प्रभाव से उनको विजय भी प्राप्त हुई. फिर ब्रह्मा जी कहने लगे इस व्रत का पालन करने से मनुष्य को इस जीवन में विजय प्राप्त होती है और अक्षय परलोक प्राप्त होता है इतना कहकर भगवान् श्री कृष्ण जी ने कहा की इस एकादशी का व्रत करने से वाजपे यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है.

विजया एकादशी शुभ मुहूर्त

विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:11 PM से दोपहर 12:57 PM तक है.

विजया एकादशी व्रत पारण करने का समय

विजया एकदशी व्रत पारण करने का समय सोमवार 28 फरवरी 2022 को सुबह 06:52 AM से लेकर सुबह 10:44 AM तक है. आप इस समय के अन्दर एकादशी व्रत का पारण कर सकते है.

Conclusion

आज हमने इस आर्टिकल में Vijaya Ekadashi Vrat Katha और विजया एकादशी शुभ मुहूर्त के बारे में जाना है. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो अपने घरवालो और दोस्तों के साथ भी जरुर शेयर करे जिससे वह भी विजया एकादशी व्रत का पालन करे और आप भी एकादशी व्रत का पालन जरुर करे. धन्यवाद!

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