Shat Tila Ekadashi Vrat Katha 2022 – षट्तिला एकादशी व्रत कथा

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अगर आप षट्तिला एकादशी का व्रत करने वाले है तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है क्यूंकि इस आर्टिकल में हम षट्तिला एकादशी व्रत कथा (Shat Tila Ekadashi Vrat Katha) और षट्तिला एकादशी का महत्व के बारे में जानेंगे.

जो व्यक्ति एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान से करता है उसके जन्म जन्मान्तर के पाप नष्ट हो जाते है और उसे मृत्यु के बाद भगवान् का धाम मिलता है. एकादशी का व्रत करने पर आपको ऐसे अन्गिन्नत फायदे होते है. इसलिए आपको एकादशी का व्रत करना चाहिए अगर आपको इस 2022 साल की सभी एकादशी तिथि के बारे में जानना है तो आप यहाँ क्लिक करे.

तो चलिए शुरू करते है और जानते है Shat tila Ekadashi Vrat Katha.

Shat Tila Ekadashi Vrat Katha – षट्तिला एकादशी व्रत कथा

एक समय की बात है नारदजी ने भगवान् विष्णु जी से पूछा की हे भगवान् विष्णु मृत्यु लोक (पृथ्वी लोक) पर मनुष्य महान पाप करते है जैसे: जानवरों पर अत्याचार करना, पराये धन को चोरी करना, काम वासना में रहना, और दुसरे मनुष्य की उन्नति देख कर ईर्ष्या करना आदि. इतने सारे पाप करने पर भी उन्हें नरक क्यों नही मिलता इसकी क्या वजह है और वे ऐसा कोनसा पूण्य करते है जिससे उनके सभी पाप नष्ट हो जाते है, कृपया करके बताइए.

तब भगवान् विष्णु जी नारदजी से कहने लगे की हे नारद मै तुम्हे एक सत्य घटना बताता हु उसे ध्यानपूर्वक सुनो. बहुत समय पहले मृत्यु लोक (पृथ्वी लोक) में एक ब्राह्मणी रहती थी वह ब्राह्मणी रोजाना व्रत करती थी. फिर एक समय वह पूरे एक मास तक व्रत करती रही. इससे उस ब्राह्मणी का शरीर बहुत जायदा दुर्बल हो गया था, और वह बहुत बुद्धिमान भी थी लकिन उसने कभी भी देवताओ या किसी ब्राह्मणों को अन्न या धन दान तक नही किया था.

इससे मैंने सोचा की ब्राह्मणी ने व्रत से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, इससे उसे विष्णुलोक मिल जाएगा लकिन ब्राह्मणी कभी भी अन्न या धन का दान नही किया, इससे उस ब्राह्मणी की तृप्ति होना अत्यंत कठिन है. ऐसा सोच विचार करके मै पृथ्वी लोक पर भिखारी के वेश में उस ब्राह्मणी के घर पर गया और उससे भिक्षा मांगी.

तब वह ब्राह्मणी बोली महाराज आप किसलिए आये हो. तब मैंने कहा की मुझे भिक्षा चाहिए. इस पर उस ब्राह्मणी ने एक मिट्टी का डगला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया, उसके बाद में स्वर्ग में लौट आया. कुछ समय बाद ब्राह्मणी का मृत्यु का समय आ गया था तो उसने अपना शरीर त्याग दिया और उसे स्वर्ग प्राप्त हुआ. ब्राह्मणी को स्वर्ग में एक सुन्दर महल मिला सिर्फ एक मिट्टी के डग्ले का दान करके, लकिन उसके महल में कुछ भी सामग्री नही थी.

ब्राह्मणी घबराकर मेरे पास आई और कहने लगी की भगवान् मैंने अनेक व्रत रखकर आपकी पूजा की लकिन फिर भी मेरा महल सभी सामग्री और वस्तुओ से शून्य क्यों है. इस पर मैंने कहा की पहले तुम अपने घर जाओ. तुम्हारे महल में देवस्त्रियाआएगी तुम्ह देखने के लिए और उनसे षट्तिला एकादशी की विधि और पूण्य सुन लो, तब द्वार खोलना. मेरे ऐसे वचन सुनकर ब्राह्मणी अपने महल गयी और जब देवस्त्रिया आई और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली की आप मुझे देखने आई है तो पहले आप षट्तिला एकादशी की विधि और पूण्य बताओ.

उन देवस्त्रिया में से एक देव्स्त्री कहनी लगी की मै आपको षट्तिला एकादशी की विधि और पूण्य के बारे में बताती हु, जब ब्राह्मणी ने षट्तिला एकादशी की विधि और पुण्य सुना तब द्वार खोल दिया. देवस्त्रियो ने ब्राह्मणी को देखा की न तो वह गांधर्वी है और न ही असुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है. उस ब्राह्मणी ने उनके कथानुसार षट्तिला एकादशी व्रत का पालन किया.

षट्तिला एकादशी के व्रत के प्रभाव से वह सुन्दर हो गयी तथा ब्राह्मणी का महल समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया.

इसलिए हर व्यक्ति को मुर्खता त्यागकर षट्तिला एकादशी और अन्य सभी एकादशी के व्रत का पालन कर्ण चाहिए जिससे उनके सभी पाप नष्ट हो जाए. और उनके सभी कष्ट, दरिद्रता आदि ख़तम हो जाए.

अगर आपके घर में कोई षट्तिला एकादशी व्रत का पालन कर रहा है तो यह आर्टिकल उनके साथ जरुर शेयर करे.

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