Shri Krishna Kripa Kataksh Stotra | श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र 2022

Shri Krishna Kripa Kataksh Stotra | श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र: राधे राधे दोस्तों अज हम इस आर्टिकल में Shri Krishna Kripa Kataksh Stotra जानेंगे. श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ आपको रोजाना करना चाहिए क्यूंकि इससे आपके सभी पाप और कष्ट नष्ट हो जायेंगे.

कृष्णमय जीवन में जो सुख है, वो सुख नही मायामय जीवन में यदि आपको यह सुख का आनंद लेना है तो रोजाना हरे कृष्णा महा मंत्र का जाप कीजिये और आनंद लीजिये क्यूंकि सिर्फ राधे कृष्ण नाम ही इस भवसागर को पार करवा सकता है.

Shri Krishna Kripa Kataksh Stotra – श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र

।। कृष्णा से प्राथना ।।

मूकं करोति वाचालं पंगु लंघयते गिरिम्।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्।।

नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च।
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद।।

।। श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र ।।

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं,
स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम्।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं,
अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥१॥

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं,
विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम्।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं,
महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्ण वारणम्॥२॥

कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं,
व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया,
युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्॥३॥

सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं,
दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम्।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं,
समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम्॥४॥

भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं,
यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम्।
दृगन्तकान्तभंगिनं सदा सदालिसंगिनं,
दिने-दिने नवं-नवं नमामि नन्दसम्भवम्॥५॥

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं,
सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनं।
नवीन गोपनागरं नवीनकेलि-लम्पटं,
नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम्॥६॥

समस्त गोप मोहनं, हृदम्बुजैक मोदनं,
नमामिकुंजमध्यगं प्रसन्न भानुशोभनम्।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं,
रसालवेणुगायकं नमामिकुंजनायकम्॥७॥

विदग्ध गोपिकामनो मनोज्ञतल्पशायिनं,
नमामि कुंजकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम्।
किशोरकान्ति रंजितं दृगंजनं सुशोभितं,
गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम्॥८॥

श्री कृष्णा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के लाभ

यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा,
मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम्।
प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान्,
भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान॥९॥

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धन्यवाद!

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Team: HindiGrab.in

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