Shri Radha Kavach in Hindi | श्री राधा कवच हिंदी 2022

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Shri Radha Kavach – श्री राधा कवच हिंदी

पार्वती उवाचं

कैलास वासीन भगवान भक्तानुग्रह कारक ।
राधिका कवचं पूण्यं कथा-स्व मामा प्रभु ।।

यद्यस्ति करुणा नाथ त्रैहि मान दुखतो भयत ।
तवं-एव शरणं नाथ शलपांसे पिनाक-दिक ।।

शिव उवाचं

सुस्व गिरिजे तुभ्यं कवचः पूर्वा-सुचितं ।
सर्व-रक्षा-करण पूण्यं सर्व-हत्या-हरम परम ।।

हरिभक्तिप्रदं साक्षात् भुक्तिमुक्तिप्रसाधनम् ।
त्रैलोक्यकरण: देवी हरिसनिध्या-करकम ।। 

सर्वत्र जयदं देवी सर्व-शत्रु-भयवाहम् ।
सर्वेक्षण: कैव भूतनाम मनो-वृत्ति-हरम परम ।।

चतुर्दा मुक्ति-जनक: सदानंद-करण परम ।
राजस्याश्वमेधानां यज्ञानं फल-दयाकम ।।

इदं कवचम-अजनात्व राधा-मंत्र: च यो जपेट ।
सा नपनोति फलं तस्य विघ्नस्तास्या पदे पदे ।।

शीर-अस्य महादेवो 'नुशुप चंद: च कीर्तितम् ।
राधा 'सय देवता प्रोक्त रां बीजम किलक: स्मितम ।।

धर्मार्थ-काम-मोक्षिणु विनियोगं प्रकृतिित: ।
श्री राधा में शिरं पातु ललनां राधिका तथा ।।

श्रीमति नेत्र-युगलं करौ गोपेंद्र-नंदिन: ।
हरिप्रिया नासिकः च भृ-युगं शशि-शोभना ।।

ऊँठ पातु कृपा-देवी अधरं गोपिका तथा ।
वृभानु-सूता दांता 'नचिबुकां गोप-नंदिनी ।।

चंद्रावली पातु गणेश जिह्वां कृष्ण प्रिया तथा ।
कंठं पातु हरि प्राण हृदय: विजया तथा ।।

बहि द्वौ चंद्र-वदना उदारं सुबालास्वसा ।
कोइयोगगणविता पातु पदौ सौभद्रिका तथा ।।

नखा 'नी-चंद्रमुखी पातु गुलफौ गोपाल-वल्लभ ।
नखन विधु-मुखी देवी गोपी पाद-तलं तथा ।।

शुभ-प्रदा पातु पूनं कुक्षौ श्रीकांत-वल्लभ ।
जानू-देशम जया पातु हरि पातु सर्वतां ।।

वाक्यां वान सदा पातु धनगरम धनेश्वरी ।
पूर्वां दीशं कृष्ण-रता कृष्ण-प्राणा च पंचिमाम ।।

उत्तरां हरिता पातु दक्षिणां वृषभानुज ।
चन्द्रावलि नैशम-एव दिवा कीवेषिता-मेखला ।।

सौभाग्य-दा मध्यादिन सयाहने काम-रूपी ।
रौद्री प्रताप पातु माम् ही गोपीनि रजनीक्षय ।।

हेतुदा संगवे पातु केतुमाला दिवर्धनके ।
सेशा 'पराह: सामवे समिता सर्व-संधिशु ।।

योगिनी भोग-समये रतौ रतिप्रदा सदा ।
कमे मैं कौतुके नित्य: योग रत्नावली मामा ।।

सर्वदा सर्व-कार्येनु राधिका कृष्ण-मनसा ।
इत्तेत-कथितं देवी कवचम् परमद्भूतम् ।।

सर्व-रक्षकारं नमः महा-रक्षकारं परम ।
उत्तर-मध्याह्न-समये सयाहने प्रपषेद-यादि ।।

सर्वार्थ-सिद्धि-तस्य-स्याद यान-मानसी वार्ता ।
राजा-द्वार सभा: च संग्रामे शतरु-संकटे ।।

प्रणार्थ-नाश-समये यां पहेत-प्रयातो नर: ।
तस्य सिद्धिर-भावेद-देवी न भयं विद्याते क्वासिट ।।

आराध्या राधिका च तेना सत्यं न सम्यः ।
गंगा-सनद-धरेर-नाम-ग्रहाद-यत-फलं लभेट ।।

तत-फलं तस्य भवति यं पषेत-प्रयातं शुचि: ।
हरिद्रा-रोचना-चंद्र-मृत: हरि-चंदनम ।।

कृत्वा लिखित्वा भुर्जे क धरयेन-मस्तके भुजे ।
कशे वा देवदेवी सा हरिर-नात्र सम्यैः ।।

कवकस्य प्रसाद ब्रह्मा शिं स्थिति हरि ।
संहारं चाहं नियत: करोमी कुरुते तथा ।।

वैष्णव विषुद्धय विरागो-गुण-शालीन ।
ददयात-कवकम-अव्यग्राम-अन्यथा नानाम-अपनुयत ।।

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